राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित "भूलन-द - मेज़" 27 मई से देश भर के सिनेमाघरों में होगी प्रदर्शित

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित "भूलन-द - मेज़" 27 मई से देश भर के सिनेमाघरों में होगी प्रदर्शित

24-May-2022    10:32:24 pm    185    Sawankumar

रायगढ़ / छत्तीसगढ़


भारत सरकार द्वारा पहली बार किसी छत्तीसगढ़ी फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाने के बाद  "भूलन -द -मेज़" सुर्ख़ियों में आयी है।

आगामी 27 मई से देश के कई महानगरों सहित पुरे छत्तीसगढ़ के थियेटरों में रिलीज होने जा रही है। यह इतिहास में पहिली बार हो रहा है की किसी छत्तीसगढ़ी फिल्म का यू.एफ.ओ कंपनी पैन इण्डिया वितरण कर रही है। और देश भर में 100 से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज हो रही है।

फिल्म के निर्देशक मनोज वर्मा ने संजीव बक्षी के उपन्यास "भूलन -कांदा" पर आधारित "भूलन -द -मेज़"को सिनेमां के परदे पर पुरे निष्ठा के साथ प्रस्तुत किया है। फिल्म में छत्तीसगढ़ की सादगी , संस्कृति और रहन सहन का बखूबी प्रस्तुति करण है और सुनील सोनी के मधुर गीत संगीत के साथ प्रख्यात गायक कैलाशा खेर की आवाज में शीर्षक गीत भूले से जो खुंद गया मै ,भूलें कांदा रिलीज होने से पहले ही लोगों की जुबान पर चढ़ चूका है। यही कारण है यह फिल्म इटली एवं कैलिफोर्निया के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में भी अपना दम ख़म साबित कर चुकी है। इसके अलावा इसे छत्तीसगढ़ शासन के तरफ से एक करोड़ रूपये की अनुदान राशि दी जा चुकी है।

अपको बता दे यह फिल्म छत्तीसगढ़ में बनी है और प्रदेश के गरियाबंद, रायपुर अन्य जिले में इसको शूटिंग हुई है। बताया जा रहा है की इस फिल्म का बजट 2 करोड़ रुपए है। फिल्म के निर्देशक बताते है  की फिल्म काफी मजेदार है। कटे तो पैसा वसूल फ़िल्म है।

छत्तीसगढ़ी  "भूलन -द -मेज़" में छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवि मीर अली मीर के लिखे गीत नन्दा जाही का रे ....काफी लोकप्रिय हैं  । फ़िल्म का पार्श्व संगीत "सांवरिया " फेम मोंटी शर्मा ने दिया है ।फिल्म में मुंबई बॉलीवुड  के नामचीन कलाकार मुकेश तिवारी , राजेन्द्र गुप्ता , अशोक मिश्रा ने अभिनय किया है । आमिर खान निर्मित  फ़िल्म "पिपली लाइव" फेम नत्था की भूमिका निभाने वाले ओंकार दास मानिक पुरी इस फ़िल्म की मुख्य भूमिका में है । छालीवुड कलाकार आशीष शेन्द्रे,सुरेश गोंडाले , डॉ अजय सहाय, पुष्पेंद्र  सिंह , सलीम अंसारी ,अनुराधा दुबे , विक्रम राज ,संजय महानंद सहित छत्तीसगढ़ के कई कलाकारों ने अभिनय किया है।  फिल्म में सामाजिक तंत्र व व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए यह सन्देश दिया गया है की देश की न्याय प्रणाली सशक्त है और लोगों को अदालत पर भरोसा है। लेकिन भूलें कांदा पर पेअर रख चुके न्याय व्यवस्था में शामिल लोगों को जगाने की जरुरत है।